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Wednesday, February 6, 2013

पढ़ने के बाद याद रहती है कहानी


रमाकांत कहानी पुरस्‍कार से सम्‍मानित कहानी दुश्‍मन मेमना और पुरस्‍कार के बारे में जानकारी के बाद अब पढ़िए इस कहानी के निर्णायक दिनेश खन्‍ना का वक्‍तव्‍य 


ओमा शर्मा की कहानी 'दुश्‍मन मेमना' मुझे एकदम आज की कहानी लगी. आज से मेरा मतलब है हमारे आज के शहर, महानगर में रहते-बसते मध्‍यवर्गीय परिवार में घटित होता यथार्थ. आज के युवाओं और अपने बच्‍चे के भविष्‍य को लेकर थोड़ा ज्‍यादा चिंतित और सचेत रहने वाले माता पिता खासतौर पर मां-बाप और उनकी इकलौती संतान. एक पंद्रह-सोलह साल की लड़की, नए जमाने के संचार माध्‍यम फेसबुक और मॉडर्न गैजेट्स जैसा खिलौना. जो उसे जान से प्‍यारा हो जाए, तब क्‍या होगा!

पेरेंट्स की चिंताएं और लड़की की हर तरह की जिद... कहानी इन तमाम चीजों के साथ मनोवैज्ञानिक जटिलता के बीच आ खड़ी होती है. फिर माता-पिता अपनी बेटी के लिए भावनात्‍मक दबाव महसूस करने लगते हैं. बेटी का लगभग ब्‍लैकमेलिंग जैसा व्‍यवहार और उनके बीच मनाचिकित्‍सकों के लंबे सवाल-जवाब का सिलसिला कहानी को आकार देता है.

कहानी दिलचस्‍प और गंभीर विषय के साथ, कई ढंकी-छिपी मनोवैज्ञानिक परतें खालती है. और फिर शिल्‍प, कलात्‍मकता और विषय की दृष्टि से भी कहानी अनोखी बन पड़ी है. कहानी पढ़ने के बाद बराबर याद रहती है. और मन में कहीं एक अनसुलझा प्रश्‍न छोड़ जाती है.

कहना जरूरी है कि अपने कथारस और ताजगी भरी भाषा के चलते मुझे रमाकांत कहानी पुरस्‍कार के लिए यह रचना सर्वथा उपयुक्‍त लगी.    

इस बारे में जानकारी यहां भी है. 

Monday, February 4, 2013

रमाकांत स्‍मृति कहानी पुरस्‍कार



रमाकांत छठे दशक के महत्वपूर्ण कथाकारों में से एक हैं. दो दिसम्बर १९३१ को जन्मे इस कथाकार के चर्चित कहानी संग्रह हैं- कार्लो हब्शी का संदूक, जिन्दगी भर का झूठ, उसकी लड़ाई, एक विपरीत कथा और कोई और बात. रमाकांत के महत्वपूर्ण उपन्यास हैं जुलूस वाला आदमी, छोटे छोटे महायुद्ध,  उपसंस्कार, खोयी हुयी आवाज़, तीसरा देश, दरवाज़े पर आग, समाधान, टूटते जुड़ते स्वर, बिस्तर और आकाश. सोवियत भूमि के सम्पादक रहे रमाकांत को सोवियत लैंड नेहरू सम्मान तो मिला हीनेल्सन मंडेला के भारत आने पर उनकी कहानी 'कार्लो हब्शी का संदूक' का भीष्म साहनी द्वारा किया गया अनुवाद उन्हें भेंट किया गया था. "क्रासाद" नामक पाक्षिक का सम्पादन और अपनी बेबाक टिप्पणियों के लिए चर्चित रमाकांत युवा रचनाकारों  को सदा प्रोत्साहित करते रहे. उनका निधन ६ दिसम्बर १९९१ को दिल्ली में हुआ.

रमाकांत जी की स्मृति में दिया जाने वाला रमाकांत स्मृति कहानी पुरस्कार अब तक १५ कहानीकारों को प्रदान किया जा चुका है. पन्द्रहवें कथाकार हैं ओमा शर्मा. इसके निर्णायक हैं रंगकर्मी दिनेश खन्‍ना. कथादेश में प्रकाशित 'दुश्‍मन मेमना' 443 कहानियों में से चुनी गई है.  


वर्ष २०१३ के लिए २०१२ में प्रकाशित कहानियां विचारणीय होंगी. इस वर्ष के अंतिम निर्णायक हैं श्री विश्वनाथ त्रिपाठी. संस्तुति और कहानी की फोटोकॉपी १५ मई २०१३ तक भेजना ज़रूरी है. प्रविष्टि इस पते पर भेजी जाए -

महेश दर्पण
संयोजक, रमाकांत कहानी पुरस्‍कार,
सी - 3/51 सादतपुर, 
दिल्‍ली -110094

अब तक पुरस्कृत कथाकार
·         नीलिमा सिन्हा
·         कृपाशंकर
·         अजय प्रकाश
·         मुकेश वर्मा
·         नीलाक्षी सिंह
·         सूरजपाल चौहान
·         पूरन हार्डी
·         अरविन्द कुमार सिंह
·         नवीन नैथानी
·         योगेन्द्र आहूजा
·         उमाशंकर चौधरी
·         मुरारी शर्मा
·         दीपक श्रीवास्तव
·         आकांक्षा पारे काशिव









महेश दर्पण , संयोजक, रमाकांत कहानी पुरस्‍कार