अनूप सेठी
Saturday, April 17, 2021
गहरे धूसर रंगों वाली फिल्म
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मनोज वाजपेयी हमारे समय के एक सशक्त अभिनेता हैं। उन्हें हाल ही में भोंसले फिल्म के लिए सर्वज्ञेष्ठ अभिनेता चुना गया है। इस फिल्म में उनका अ...
Saturday, February 6, 2021
साहित्य कला में ‘कल’ की कलाकारियां
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साहित्य कला में ‘ कल ’ की कलाकारियां यंत्र का सभ्यता से बहुत पुराना संबंध है। हर युग में नए-नए यंत्र ईजाद हुए हैं। हमारा जीवन उनसे प्र...
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Thursday, January 28, 2021
नीम बेहोशी
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बनास जन में छपी कविताओं की कड़ी में अंतिम कविता ।।नीम बेहोशी।। मंत्री की गाड़ी के काफिले से डर लगता है। उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस के प्र...
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Wednesday, January 6, 2021
हलफनामा
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बनास जन में छपी कविताओं में से एक और कविता पढ़िए। ।।हलफनामा ।। फंसा फंसा तो इसलिए लग रहा है क्योंकि दर्जी ने कमीज तंग सिल दी है...
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Monday, November 23, 2020
नया हाकिम
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आपने बनास जन में छपी चार कविताओं में से एक कविता खेल कुछ दिन पहले पढ़ी थी। यह अंक ऑनलाइन ही छपा है। आज उन्हीं चार में से दूसरी कविता ...
Monday, November 2, 2020
खेल
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कागज पर जलरंग : महेश वर्मा यह कविता कोरोना काल से पहले की है। दरअसल कोरोना शरु होने के बाद मुझसे कोई कविता लिखी ही नहीं गई। अलबत्ता दो-एक...
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Friday, September 25, 2020
विजय कुमार की तीन कविताओं पर एक टिप्पणी
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छायांकन : हरबीर सिंह मनकू बजती हुई सांकल (विजय कुमार की तीन कविताओं पर एक टिप्पणी) कुछ को - सबको नहीं सब में से बहुतों को भी नहीं बल्कि बहु...
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