अनूप सेठी

Sunday, August 28, 2016

स्‍टेट औफ होमलैंड

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रणवीर सिंह बिष्‍ट सलमान मासाल्‍हा की मूल कविताओं के ये हिंन्‍दी अनुवाद विवियन ईडन के अंग्रेजी अनुवाद से किए हैं ।  ये कविताएं नया ज्ञा...
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स्‍टेट ऑफ होमलैंड

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रणबीर सिंह बिष्‍ट सलमान मासाल्‍हा की मूल कविताओं के ये हिंन्‍दी अनुवाद  विवियन ईडन के अंग्रेजी अनुवाद से किए हैं ।  ये कविताएं नया ज्...
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Saturday, August 27, 2016

स्‍टेट ऑफ होमलैंड

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रणवीर सिंह बिष्‍ट तीतर की पूंछ मेरे होठों में है एक छोड़ा हुआ वतन अपने कंधों से झाड़ता गेहूं की बालियां जो चिपक गईं उसके सिर ...
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स्‍टेट ऑफ होमलैंड

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एल मुनुस्‍वामी आपने हिब्रू और अरबी कवि सलमान मासाल्‍हा की कविताएं यहां पहले भी पढ़ी हैं।  अब पेश हैं कुछ और कविताएं।  ये हिंन्‍द...
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Friday, August 5, 2016

पुरस्‍कृत कविता

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कल भारत भूषण अग्रवाल पुरस्‍कार शुभम् श्री की 'पाेएट्री मैनेजमेंट' कविता  को देने की घोषणा हुई और जैसा अक्‍सर होता है, सोशल मीडि...
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Sunday, April 17, 2016

तर्पण

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छायांकन: अरुधती भृकुटियां तनी रहीं सोच की प्रत्‍यंचा पर सालों साल फसल कटे खेतों के खूंटों पर चलना होता था जब झुके कंधे तुम्‍हा...
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गेहूं

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छायांकन: अरुधती मुझे बोरी में मत भरो लोको बाजार में लुटेरों सटोरियों के हाथ बिकने से बचा लो खाए अघाए का कौर बनने को सरकारी गोदा...

रोजनामचा

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छायांकन: अरुधती मैं 365 दिन वही करता हूं जो उसके अगले दिन करता हूं मुझे मालूम है कि मैं 365 दिन वही करता हूं और मुझे 365 दिन...
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Sunday, October 4, 2015

जुगाली उर्फ गऊ चिंतन

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जीते जी मरण मेरा भेजा फिर गएला है मेरे बाप। मेरे कू किधर का नईं छोड़ा ए लोग। मयैं बौह्त अकेली रह गई रे। मेरी पुच्‍छल पकड़ के सुर्ग ...
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Thursday, May 7, 2015

आप सब की साक्षी में मैं उपस्‍थित हूं यहां पर

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मधुकर भारती का यह कैरीकेचर कोई बीस एक साल पुराना है, सादे कागज पर पेन से फोटो देखकर बनाया था। पिछले दिनों हिमाचल प्रदेश के एक बेहद जम...
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Saturday, March 28, 2015

परमिंदरजीत

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अक्खर के संपादक और पंजाबी कवि परमिंदरजीत और बाबा के नाम  यह कविता 2008 में लिखी थी।  तब भी मुलाकात नहीं हो पाई थी।  उसके बाद कभी...
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Saturday, November 29, 2014

जूते

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नई पीढ़ी में ऐसे भी लोग हैं जो हिंदी साहित्‍य को प्रौद्योगिकी के सहयोग से व्‍यापक पाठक वर्ग तक ले जाना चाहते हैं। इन्‍हीं में से एक युवा फ...
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Thursday, October 30, 2014

कुत्ताघर

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                                                           कागज पर पेंसिल : मुदित सेठी  यह कहानी 1989 में वर्तमान साहित्‍य में छपी थ...
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