अनूप सेठी
Sunday, April 17, 2016
तर्पण
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छायांकन: अरुधती भृकुटियां तनी रहीं सोच की प्रत्यंचा पर सालों साल फसल कटे खेतों के खूंटों पर चलना होता था जब झुके कंधे तुम्हा...
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गेहूं
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छायांकन: अरुधती मुझे बोरी में मत भरो लोको बाजार में लुटेरों सटोरियों के हाथ बिकने से बचा लो खाए अघाए का कौर बनने को सरकारी गोदा...
रोजनामचा
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छायांकन: अरुधती मैं 365 दिन वही करता हूं जो उसके अगले दिन करता हूं मुझे मालूम है कि मैं 365 दिन वही करता हूं और मुझे 365 दिन...
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Sunday, October 4, 2015
जुगाली उर्फ गऊ चिंतन
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जीते जी मरण मेरा भेजा फिर गएला है मेरे बाप। मेरे कू किधर का नईं छोड़ा ए लोग। मयैं बौह्त अकेली रह गई रे। मेरी पुच्छल पकड़ के सुर्ग ...
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Thursday, May 7, 2015
आप सब की साक्षी में मैं उपस्थित हूं यहां पर
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मधुकर भारती का यह कैरीकेचर कोई बीस एक साल पुराना है, सादे कागज पर पेन से फोटो देखकर बनाया था। पिछले दिनों हिमाचल प्रदेश के एक बेहद जम...
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Saturday, March 28, 2015
परमिंदरजीत
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अक्खर के संपादक और पंजाबी कवि परमिंदरजीत और बाबा के नाम यह कविता 2008 में लिखी थी। तब भी मुलाकात नहीं हो पाई थी। उसके बाद कभी...
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Saturday, November 29, 2014
जूते
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नई पीढ़ी में ऐसे भी लोग हैं जो हिंदी साहित्य को प्रौद्योगिकी के सहयोग से व्यापक पाठक वर्ग तक ले जाना चाहते हैं। इन्हीं में से एक युवा फ...
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Thursday, October 30, 2014
कुत्ताघर
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कागज पर पेंसिल : मुदित सेठी यह कहानी 1989 में वर्तमान साहित्य में छपी थ...
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