अनूप सेठी
Saturday, August 18, 2012
कचरा मसीन
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सिद्धार्थ की गाय मेरी पिराबलम बोले तो मालूम क्या है? मैं हर टैम फील करती है कि आदमी लोक की बस्ती में रहती है तो आदमी लोक का हेल्प ...
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Friday, June 29, 2012
अबे! ओ!! कवि!!!
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तू लिक्ख कागज को घोच मत अच्छी कविता लिक्ख
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Saturday, June 16, 2012
समकालीन कविता
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चिंतनदिशा में समकालीन कविता पर विजय बहादुर सिंह और विजय कुमार की चिट्ठियां आप पढ़ चुके हैं. फिर अगले अंक में उन चिट्ठियों पर विजेंद्र और...
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Thursday, June 14, 2012
समकालीन कविता
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चिंतनदिशा में समकालीन कविता पर विजय बहादुर सिंह और विजय कुमार की चिट्ठियां आप पढ़ चुके हैं. फिर अगले अंक में उन चिट्ठियों पर व...
Monday, June 11, 2012
समकालीन कविता
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चिंतनदिशा में समकालीन कविता पर विजय बहादुर सिंह और विजय कुमार की चिट्ठियां आप पढ़ चुके हैं. फिर अगले अंक में उन चिट्ठियों पर विज...
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Friday, June 8, 2012
समकालीन कविता
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चिंतनदिशा में समकालीन कविता पर विजय बहादुर सिंह और विजय कुमार की चिट्ठियां आप पढ़ चुके हैं. फिर अगले अंक में उन चिट्ठियों पर विजें...
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Sunday, May 27, 2012
मेरे हिस्से के रावत जी
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जब से खबर मिली है, भगवत रावत नहीं रहे, उनकी छवि रह रह के आंखों के सामने तैर जाती है. जिंदादिल, आत्मीय और मुस्कुराता चेहरा. शायद...
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Tuesday, May 22, 2012
पितृसत्ता को भूलो और बोलो "सत्यमेव जयते"
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जगदीश्वर चतुर्वेदी इधर अपने ब्लाग में समसामयिक विषयों पर नियमित टिप्पणियां कर रहे हैं. सत्यमेव जयते पर उनकी टिप्पणी आप भी पढि़ए. ...
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Sunday, April 29, 2012
बचपन : समृतियों का सॉफ्टवेयर
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मैं बचपन में गांव में था तो स्कूल की कोई याद नहीं है , कब लगता था कब छूटता था। बस आना जाना भर याद है। रास्ते में एक खड्ड पड़ती थी। ज...
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