अनूप सेठी
Sunday, April 29, 2012
बचपन : समृतियों का सॉफ्टवेयर
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मैं बचपन में गांव में था तो स्कूल की कोई याद नहीं है , कब लगता था कब छूटता था। बस आना जाना भर याद है। रास्ते में एक खड्ड पड़ती थी। ज...
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Sunday, April 1, 2012
ढोलरू – प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का गान
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शायद दो साल पहले की बात है. सुबह तैयार हो कर दफ्तर के लिए निकला तो हवा खुशगबार थी. यूं वक्त का दबाव हमेशा बना रहता है लेकिन उस दिन हवा म...
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Saturday, March 10, 2012
ठंड में ठियोग
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इस बार सर्दी का मौसम बड़ा लंबा चल रहा है. कहते हैं कि लोहड़ी वाले दिन सर्दी लंबी छलांग लगाती है. लेकिन...
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Thursday, February 16, 2012
समकालीन कविता
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समकालीन कविता पर चल रही बहस में आप विजय बहादुर सिंह और विजय कुमार के पत्र पढ़ चुके हैं और इन पत्रों पर विजेंद्र की प्रतिक्रिया भी. अब...
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Saturday, February 11, 2012
समकालीन कविता
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आप डॉ. विजय बहादुर सिंह और विजय कुमार के बीच समकालीन कविता पर हुए पत्राचार को पढ़ चुके हैं जो मूलतः चिंतनदिशा में छपा था. अब ...
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Wednesday, January 25, 2012
मैं अनुभव और भाषा का आजाद गुलाम हूं
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हाल में पर्वत राग का लीलाधर जगूड़ी अंक छपा है. उसमें जगूड़ी जी ने अपने और अपनी कविताई के बारे में लिखा है. आप भी पढि़ए. मेरा ज...
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