अनूप सेठी
Sunday, August 28, 2011
कविता: कितनी मजबूरी, कितनी जरूरत
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यह पूरा अंक यहां रखा है. डायरी के कुछ अंश ऊना, हिमाचल प्रदेश से गुरमीत बेदी की पत्रिका पर्वत राग में छपे थे. उसके नए अंक की प्रतीक्षा है...
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Sunday, August 14, 2011
बरसात और छाता
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पिछली बरसात में छाते पर चर्चा चली थी. इस बीच हमारे बड़े भाई तेज जी ने वो पोस्ट देखी और छाते पर यह टिप्पणी भेजी - तुम्हारे ब्लाग में से...
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Saturday, August 6, 2011
सुर में आलाप
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कवि सुंदर चंद ठाकुर नव भारत टाइम्स के मुंबई संस्करण के संपादक बने तो उन्होंने अखबार में साहित्य कला के लिए थोड़ी जगह निकाली और पुस्तक ...
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Saturday, July 9, 2011
तिब्बती कविता
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धर्मशाला, मेक्लोडगंज में दलाई लामा और तिब्बती रहते हैं. वहीं हैं कवि लासंग शेरिंग . एक दोस्त ने उनसे मुलाकात कराई, मैक्लोडगंज में ही, ज...
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गड़बड़
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लेबल ठीक करते करते न जाने क्या गड़बड़ हो गई कि दो पुरानी टिपपणियां सबसे ऊपर आकर चिपक गईं. इन्हें अपनी जगह वापस कैसे रखते हैं, यह समझ नहीं ...
सरदार
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रात दो बजे का वक्त है। पंजाब का एक खदबदाता हुआ शहर - लुधियाना। कहते हैं लुधियाना के लोग विदेश जा बसे हैं। यह ए...
बाबूजी, संभलना
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जमाना बदलता है तो उसकी चाल ढाल भी बदलती है। रंग ढंग भी बदलते हैं। क्या चाल ढाल और रंग ढंग से ही जमाने की पहचान होती है ? पूरे तौर पर न होत...
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Saturday, June 18, 2011
साहित्य के सामने नई चुनौतियां
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पिछले दिनों रेडियो चीन से एक बातचीत दो भागों में प्रसारित हुई. बातचीत साहित्य, सूचना क्रांति और पाठक पर केंद्रित थी. यह नीचे दिए लि...
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