अनूप सेठी

Friday, June 25, 2010

बारिश का स्‍वागत

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चित्र साभार एक और कोशिश गोवर्धन अंगुली पर धारा, पांचाली का चीर बढ़ा आता मात पिता, गुरू, बंधु, सखा आशीष, ज्ञान, प्रेम मिल जाता बुद्ध...
Thursday, June 24, 2010

बारिश का स्‍वागत

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चित्र साभार मुंबई में अंबर बरस रहा है मजे से. निचले इलाकों में पानी भी भर रहा है, आटो टेक्‍सी वाले भी एक डेढ दिन रूठे रहे. प...
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Sunday, June 20, 2010

बारिश का स्‍वागत

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भाई द्विजेंद्र द्विज ने छाते की महिमा जरा दूसरे ढंग से गाई है. जरा देखिए तो - छरहरा छड़ डर पास न आता ओढ़ो तो तन भीग न पाता धूप में छाय...
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Thursday, June 17, 2010

बारिश का स्‍वागत

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सिर पर धर लो तन भीग न पाता हो जब धूप कड़ी तब छाया दे जाता छरहरी छड़ी बने डर पास न आता क्‍यों सखी साजन न सखी छाता रेखांकन सुमनिका का...
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Wednesday, June 2, 2010

कवि होना उतना ही कठिन है जितना एक अच्छा इन्सान होना

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कवि मोहन साहिल की शिमला से करीब चालीस किलोमीटर दूर ठियोग कस्‍बे में चाय की दुकान है. पिछले दिनों कुल्‍लू में एक सेमिनार हुआ जिसमें ...
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Monday, May 3, 2010

के पी सिंह की याद में

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Monday, March 22, 2010

किंतु परंतु लेकिन फिर भी आओ साथी सपना देखें

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पृथ्‍वी थियेटर में कल शाम (21 मार्च 6 बजे का शो) एक नाटक देखा, आओ साथी सपना देखें. दो साल पहले पृथ्‍वी फैस्‍टीवल में जब यह पहली बार खेला गया...
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Wednesday, February 24, 2010

कुनबा

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बाल कटाकर शीशा देखूं आंखों में आ पिता झांकते बाल बढ़ा लेता हूं जब दाढ़ी में नाना मुस्काते हैं कमीज हो या कुर्ता पहना पीठ से भैया ज...
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Friday, February 5, 2010

हिमालय में हैंड ग्लाइडिंग, नहीं पहाड़ में हिचकोले खाती जिंदगानी हरदम

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हरबीर का खींचा हुआ भागसू नाथ मंदिर परिसर का यह चित्र साभार. चित्र में वल्‍लभ डोभाल कुछ पढ़ रहे हैं. 6 भागसूनाग बहुत दूर दिखता है ज...
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Tuesday, February 2, 2010

हिमालय में हैंड ग्लाइडिंग, नहीं पहाड़ में हिचकोले खाती जिंदगानी हरदम

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5 दलाईलामा का मैक्‍लोडगंज घाटी में पुरातत्ववेता ईसा से पहले के बौ द्ध स्तूप के अवशेष पाता है ईसा के बहुत बाद भगाया गया बौ द्...
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Friday, January 29, 2010

हिमालय में हैंड ग्लाइडिंग, नहीं पहाड़ में हिचकोले खाती जिंदगानी हरदम

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4 पहाड़ियां और झाड़ियां ( कांगड़ा के मसरूर में प्रचीन शैल-खनित मंदिर का इलाका) हम ऐसी जगह पर उतर आए जहां चोटियों पर चढ़कर घाटिय...
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Tuesday, January 26, 2010

हिमालय में हैंड ग्लाइडिंग, नहीं पहाड़ में हिचकोले खाती जिंदगानी हरदम

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3 जल जीवन की अनंत काया ( मंडी के पुराने शहर की बावड़ी पर दिल कुर्बान) एक खींचकर लाई पहाड़ों की जड़ों से बहाई सदियों से अजस्र जल...
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Friday, January 22, 2010

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कुल्‍लू और मनाली के बीच नग्‍गर में निकोलिस रोरिक के खुले संग्रहालय में रखे लोकशिल्‍प 2 रोहतांग से दुनिया में वापसी हवा कुछ बची है चोटियों पर...
Thursday, January 21, 2010

हिमालय में हैंड ग्लाइडिंग, नहीं पहाड़ में हिचकोले खाती जिंदगानी हरदम

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यह छः कविताओं की श्रृंखला है. मनाली से केलंग जाने के रास्‍ते में रोहतांग दर्रे से शुरु होकर धर्मशाला तक पहुंचाती हुई एक जमीनी उड़ान. बारी ब...
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