अनूप सेठी
Wednesday, February 25, 2009
दो कविताएं
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अब दो कविताएं पढि़ए. ये भी उसी माहौल से निकली हैं, जहां से पिछला लेख निकला था। राकेश जी को लगा, लुधियाना शहर का ये चित्र कल्पना से लिखा है...
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Wednesday, February 11, 2009
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यह चित्र हमारे प्रिय और प्रसिद्ध सौंदर्यबोधशास्त्री विद्वान रमेश कुंतल मेघ की पुस्तक साक्षी है सौंदर्य प्राश्निक का मुख पृष्ठ है। पुरुष...
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Friday, January 9, 2009
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उदासी के कारोबार मुंबई के अखबार उर्दू टाइम्स ने हिंदी अखबार निकाला। उसके संपादक थे सुधांशु शेखर। वहां मैंने कुछ अर्सा अंतर्नाद , फिर बात ब...
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Saturday, December 6, 2008
कविता:किसी दिन अचानक
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किसी दिन अचानक सुबह, शाम या रात में आंखों के सामने आ खड़ा हो आसमान भुरभुरी धुंध, बादल पहाड़ी पर चढ़ आएं स्लेट की छतों को ढक लें धीरे...
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Friday, November 28, 2008
मुंबई मेरी जान
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मुंबई मेरी जान आज दूसरा दिन है. मुंबई आतंकवादियों के चंगुल में है। और मन बहुत उखड़ा हुआ है । यह शहर नहीं शरीर है मेरा एक हिस्सा छल...
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Monday, November 24, 2008
कविता
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राम शिला की प्रार्थना (एक कांगड़ी लोकगाथा, जिसमें बहू को दीवार में चिनवा कर बलि देने का करुण वर्णन है, की शैली में) अगल भी चिनना बगल भी ...
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Tuesday, November 18, 2008
हजामत
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सैलून की कुर्सी पर बैठे हुए कान के पीछे उस्तरा चला तो सिहरन हुई आइने में देखा बाबा ने साठ-पैंसठ साल पहले भी कान के पीछे गुदगुदी हुई ...
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Sunday, November 16, 2008
कबाड़
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उन्होंने बहुत सी चीज़ें बनाईं और उनका उपयोग सिखाया उन्होंने बहुत सी और चीज़ें बनाईं दिलफरेब और उनका उपभोग सिखाया उन्होंने हमारा तन मन ...
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जूते
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कई हज़ार साल पहले जब एक दिन किसी ने खाल खींची होगी इंसान की उसके कुछ ही दिन बाद जूता पहना होगा धरती की नंगी पीठ पर जूतों के निशान मिलत...
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