Monday, October 12, 2009

तदेउष रोज़ेविच की कविताएं




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एक मुलाकात

मैं उसे पहचान नहीं पाया

जब मैं यहां आया

हो सकता है यह भी हुआ हो

इन फूलों को सजाने में इतनी देर लगी

इस बेडौल गुलदान में

'मुझे इस तरह न देखो '

उसने कहा

मैंने छेड़ा कटे बालों को

अपने खुरदुरे हाथ से

'उन्होंने काट दिए मेरे बाल '

उसने कहा

'देखो उन्होंने मेरे साथ क्या कर डाला '

अब फिर से वह आसमानी रंग का झरना

फड़कने लगा है उसकी गर्दन की पारदर्शी

त्वचा के नीचे हमेशा की तरह

जब वह आंसू पी जाती है


वो इस तरह एकटक देख क्यों रही है

मुझे लगता है चले जाना चाहिए

मैं कुछ ज्यादा ही जोर से बोल देता हूं

और मैं निकल आता हूं

मेरे गले में एक थक्का है।

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